झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर अकेले चुनाव लड़ने का बड़ा फैसला लिया है। पार्टी असम की 19 सीटों पर अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ पर उम्मीदवार उतारेगी, जबकि एक सीट भाकपा माले के लिए छोड़ दी गई है।
JMM के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने पुष्टि की है कि पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी और संगठनात्मक तैयारी पूरी कर ली गई है। नामांकन की अंतिम तिथि से ठीक पहले ही पार्टी ने अपने उम्मीदवारों और चुनाव रणनीति का ऐलान कर दिया है।
कांग्रेस से क्यों नहीं बनी बात
असम में सीट शेयरिंग को लेकर JMM और कांग्रेस के बीच लंबे समय तक बातचीत चल रही थी। इस दौरान हेमंत सोरेन ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई से भी चर्चा की थी। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस JMM को 5 सीटें देने को तैयार थी, जबकि JMM ने 20 सीटों की मांग रखी थी।
रविवार को हेमंत और कल्पना सोरेन दिल्ली पहुंचे, लेकिन कांग्रेस 7 सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं हुई। इस गतिरोध के बाद JMM ने गठबंधन से अलग होकर अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
‘तीर-कमान’ पर उतरेगी JMM
पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी, असम के पास अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ के आवंटन के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल गई है। अब JMM झारखंड के बाद असम में भी उसी प्रतीक के साथ अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश करेगी।
ST आरक्षित सीटों पर फोकस
असम में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 19 सीटें आरक्षित हैं, और JMM ने इन्हीं सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में उसकी पकड़ मजबूत हो सकती है।
पार्टी ने रविवार को अपने उम्मीदवारों को सिंबल देना भी शुरू कर दिया। सबसे पहले प्रीति रेखा बारला और सोनारी सीट से बलदेव तेली को उम्मीदवार घोषित किया गया। इस दौरान चमरा लिंडा भी मौजूद रहे।
रणनीति और प्रचार
असम में फिलहाल हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में बीजेपी सरकार है, जबकि कांग्रेस मुख्य विपक्ष में है। ऐसे में JMM खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है।
पार्टी की रणनीति चाय बागानों में काम करने वाले टी-ट्राइब समुदाय और आदिवासी वोट बैंक पर केंद्रित है। JMM को उम्मीद है कि इन वर्गों में उसे मजबूत समर्थन मिलेगा।
JMM ने अपने स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी कर दी है, जिसमें हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन प्रमुख हैं। हेमंत सोरेन चुनाव से पहले असम में दो बड़ी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं और पार्टी अब आक्रामक प्रचार अभियान की तैयारी में है।
राजनीतिक असर
कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद JMM का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला असम की राजनीति में नया समीकरण पैदा कर सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आदिवासी और टी-ट्राइब वोट बैंक के सहारे कितनी सीटों पर असर डाल पाती है और इसका बीजेपी और कांग्रेस पर क्या प्रभाव पड़ता है।
