रांची | 3 जनवरी 2026
मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा की 123वीं जयंती के अवसर पर आज झारखंड जनाधिकार महासभा एवं मुण्डा सभा के संयुक्त तत्वावधान में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम, रांची में एक गरिमामय श्रद्धांजलि एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संविधान निर्माण में मरांग गोमके के योगदान तथा आदिवासी अधिकारों के लिए उनके ऐतिहासिक संघर्ष को स्मरण करना रहा।
कार्यक्रम प्रातः 10:30 बजे प्रारंभ हुआ, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा वर्ग एवं विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। इस अवसर पर मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के विचारों, विशेष रूप से आदिवासी समाज, लोकतंत्र, स्वशासन और सामाजिक न्याय पर उनके दृष्टिकोण पर विस्तृत चर्चा की गई।
झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से टॉम कावला, मुण्डा सभा से बिलकन डांग, पी. एस. सांगा, तथा माले से राम नरेश सिंह ने अपने विचार रखे और मरांग गोमके के जीवन, संघर्ष और योगदान पर प्रकाश डाला।
मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा (03 जनवरी 1903 – 20 मार्च 1970) आधुनिक भारत के उन महान नेताओं में से थे जिन्होंने आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत किया। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद्, कुशल खिलाड़ी (ओलंपियन हॉकी कप्तान), संविधान सभा के सदस्य तथा आदिवासी राजनीति के अग्रदूत थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
संविधान सभा में उन्होंने आदिवासियों के जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों, उनकी सांस्कृतिक पहचान तथा स्वशासन की परंपराओं की सशक्त वकालत की। वे झारखंड राज्य की अवधारणा के प्रमुख सूत्रधारों में से एक रहे और जीवनभर आदिवासी समाज की आवाज़ बने रहे।

यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मरांग गोमके के सपनों के झारखंड और समानता, न्याय एवं लोकतंत्र पर आधारित भारत के निर्माण के संकल्प को दोहराने का अवसर भी बना।
कार्यक्रम में महासभा से टॉम कावला, एलिना होरो, लीना पदम, अलका आईंद, आकांक्षा बिहान, मनोज तिरु, मुण्डा सभा से बिलकन डांग, पी. एस. सांगा, तनूजा मुण्डा, सोसन समद, माले से राम नरेश सिंह, सुदामा खलखो सहित कई अन्य साथी उपस्थित रहे। सभी की सजग और सक्रिय उपस्थिति से यह कार्यक्रम अत्यंत सार्थक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
