HC का ऐतिहासिक फैसला : तेजाब पीड़ित से लिंगभेद अन्याय, पुरुष पीड़ित को 15 लाख मुआवजा दे सरकार

झारखंड हाई कोर्ट ने पुरुष एसिड पीड़ित मामले में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए यह कहा है कि राज्य सरकार के अधिसूचना के अनुसार पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजा में लिंगभेद अन्याय है, झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश रोगोंन मुखोपाध्याय एवं न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने तेजाब पीड़ित राहुल कुमार की अपील याचिका पर फैसला सुनाते हुए उसे पूर्व में मिले 3 लाख रुपए मुआवजे के अलावा पांच गुना यानी 15 लाख रुपया मुआवजा देने का आदेश राज्य सरकार को दिया है. अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित राहुल कुमार को मुआवजे के अलावा उचित उपचार की भी व्यवस्था मुहैया कराई जाए, अदालत में अपने आदेश में कहा कि तेजाब हमला का लिंग से कोई लेना-देना नहीं है, इसमें लिंग भेद करना पूरी तरह से अन्याय होगा. प्रार्थी की अधिवक्ता स्नेहलिका भगत बताती है कि झारखंड पीड़ित प्रतिकर योजना 2016 के तहत झारखंड हाई कोर्ट के एकल पीठ में मुआवजे के तौर पर तीन लाख रूपये मुआवजे के तौर पर देने के अलावा आदेश की तिथि तक उपचार के खर्च के वहन का भी आदेश अदालत ने दिया था. जबकि अदालत ने कई बार महिला पीड़ितों के लिए विशेष आदेश जारी किए हैं जिसमें मुआवजे में बढ़ोतरी के अलावा उसके उपचार के पूरे खर्च को सरकार को उठाने का आदेश दिया है, लेकिन किसी पुरुष पीड़ित मामले में न्यूनतम निर्धारित है जिससे प्रार्थी इससे संतुष्ट नहीं है क्योंकि इस घटना से उसके सामाजिक आर्थिक और मानसिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया और यह रकम उसके उपचार के लिए बेहद कम है जिसे चुनौती दी गई.अपील में लगभग 5 साल की देरी को स्वीकृतिप्रार्थी की अधिवक्ता स्नेहलिका भगत बताती है कि न्यायिक जगत के इतिहास में यह पहला मामला होगा जहां किसी अपील को लगभग 5 साल की देरी के बाद भी स्वीकृत किया गया, सुप्रीम कोर्ट के आदेश में तेजाब पीड़ित सोनाली बनर्जी एवं लक्ष्मी कुमारी जैसे केस के मद्देनजर अदालत ने संवेदनशीलता के आधार पर अपील को स्वीकृत किया उसे पर सुनवाई की और दलीलें सुनी.

Leave a Reply

Discover more from Tribal Plus News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading