रांची: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2026 का अपना पहला बड़ा मामला दर्ज करते हुए झारखंड पर्यटन विकास निगम (JTDC) में करीब 10 करोड़ 40 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का खुलासा किया है। इस बहुचर्चित घोटाले में निगम अधिकारियों, बैंक प्रबंधन और बाहरी नेटवर्क की मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
इन अधिकारियों पर दर्ज हुआ केस
ईडी ने ECIR संख्या 1/2026 में जेटीडीसी के तत्कालीन लेखापाल सह कैशियर गिरजा प्रसाद सिंह के साथ केनरा बैंक की हटिया शाखा के तत्कालीन प्रबंधक अमरजीत कुमार और आलोक कुमार को आरोपी बनाया है। एजेंसी का मानना है कि इनकी भूमिका संदिग्ध लेनदेन में महत्वपूर्ण रही है।
फर्जी हस्ताक्षर से खुला खाता
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि 21 जून 2023 को जेटीडीसी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर केनरा बैंक की हटिया शाखा में निगम के नाम पर एक खाता खोला गया। इसके बाद 13 अक्टूबर 2023 को इसी खाते में 10 करोड़ 40 लाख 7,496 रुपये ट्रांसफर किए गए।
संदिग्ध खातों में रकम का ट्रांसफर
ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस भारी रकम को योजनाबद्ध तरीके से कई संदिग्ध बैंक खातों में भेजा गया। इनमें रांची और पतरातू के निजी खातों के अलावा अन्य व्यक्तियों के नाम पर खोले गए खातों का भी इस्तेमाल किया गया, जहां से बाद में रकम की निकासी कर ली गई।
बंगाल कनेक्शन की जांच
मामले में पश्चिम बंगाल के कुछ कारोबारियों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा और पूरा नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था।
26 मार्च को कोर्ट में रिपोर्ट
मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को रांची स्थित ईडी की विशेष अदालत में होगी, जहां एजेंसी अपनी प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी। साथ ही धन के अंतिम गंतव्य का पता लगाने की प्रक्रिया जारी है।
CID और ATS ने पहले की थी जांच
इस घोटाले की शुरुआत धुर्वा थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। बाद में पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर मामला अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंपा गया। वहीं एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) के एसपी ऋषभ कुमार झा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया था। विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आने के बाद अब ईडी की एंट्री से जांच ने रफ्तार पकड़ ली है।
