**रांची में आरएसएस का जनजातीय संवाद : संघ प्रमुख बोले—

“जिस दिन जनजाति समाप्त हो जाएगा, सनातन समाप्त हो जाएगा”**

रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से शनिवार को झारखंड की राजधानी रांची स्थित कार्निवल बैंक्वेट हॉल में जनजातीय संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संवाद में बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से आए करीब एक हजार जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दोनों सत्रों में संघ प्रमुख मोहन भागवत स्वयं उपस्थित रहे।

सुबह 10.30 बजे शुरू हुए पहले सत्र में धर्म परिवर्तन, बाहरी घुसपैठ, डी-लिस्टिंग, जनजातीय आरक्षण, पेसा कानून की खामियां, भूमि विवाद समेत कई अहम मुद्दों पर प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न और सुझाव रखे। इस दौरान भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) की अधिकारी निशा उरांव ने झारखंड सरकार द्वारा लाए गए पेसा कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसकी खामियों को विस्तार से सामने रखा।

दोपहर 2 बजे से शुरू हुए दूसरे सत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनजातीय समाज की भूमिका और चुनौतियों पर विस्तृत रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा,
“सनातन का मूल जनजाति समाज है। जिस दिन जनजाति समाप्त हो जाएगा, उसी दिन सनातन भी समाप्त हो जाएगा।”

संघ प्रमुख ने धर्म परिवर्तन पर चिंता जताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए समाज को स्वयं आगे आना होगा। उन्होंने जनजातीय समाज से संगठित होकर चुनौतियों का सामना करने का आह्वान किया और कहा कि समस्याओं का समाधान केवल सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में निशा उरांव ने बताया कि संघ प्रमुख ने विविधता में एकता को भारत का मूल धर्म बताया और समाज को एकजुट रहकर चुनौतियों से निपटने का संदेश दिया।

एक दिवसीय इस जनजातीय संवाद कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा, चंपाई सोरेन, मधु कोड़ा, सीता सोरेन, गीता कोड़ा, समीर उरांव, शिवशंकर उरांव सहित बड़ी संख्या में जनजातीय नेता और सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

Leave a Reply

Discover more from Tribal Plus News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading