झारखंड पुलिस के कांस्टेबल एवं आदिवासी समाज के होनहार सपूत भरत उरांव का सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन पूरे समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। यह हृदयविदारक हादसा उस समय हुआ, जब वे अपने नन्हे बच्चे के इलाज के लिए ड्यूटी से घर लौट रहे थे। इस दुर्घटना ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे आदिवासी समाज और क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है।
स्वर्गीय भरत उरांव अपने पीछे दो छोटे-छोटे बच्चों और परिवार को छोड़ गए हैं। उनके अचानक चले जाने से परिवार के भविष्य पर गहरा आघात लगा है। भरत उरांव एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी होने के साथ-साथ समाज के लिए प्रेरणा थे, जिनकी सेवा भावना और जिम्मेदारी हमेशा याद की जाएगी।

इस दुखद अवसर पर युवा नेता ओम शंकर गुप्ता भरत उरांव के पैतृक गांव हिसरी पहुंचे और मिट्टी देकर अंतिम संस्कार की रस्म में शामिल हुए। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की तथा इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।

ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि भरत उरांव न केवल झारखंड पुलिस का एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ सिपाही था, बल्कि आदिवासी समाज और हम सभी का भाई था। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता और उनका जाना समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
इस दौरान गांव एवं समाज के लोगों ने भी नम आंखों से भरत उरांव को अंतिम विदाई दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।
