रांची | चंपाई सोरेन प्रेस कॉन्फ्रेंस
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने पेसा नियमावली को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। रांची में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य गठन के पच्चीस वर्षों बाद पेसा नियमावली लागू की गई, लेकिन इसके माध्यम से आदिवासी समाज के हितों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया गया है।
चंपाई सोरेन ने कहा कि पेसा नियमावली के पहले पेज में ही आदिवासी समाज का अहित कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने आदिवासी समाज के साथ बड़ा धोखा किया है। पेसा एक्ट मूल रूप से शिड्यूल्ड एरिया के लिए बनाया गया था, लेकिन राज्य सरकार ने नियमावली में रूढ़िजन्य परंपराओं को ही हटा दिया है, जिससे पेसा की मूल भावना को समाप्त कर दिया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शिड्यूल्ड एरिया की जनता को सरकार ने धोखा दिया है और नियमावली बनाकर ग्राम सभा को कमजोर करने का काम किया गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पेसा नियमावली आखिर किसके लिए बनाई गई है? पहले ग्राम सभा सीएनटी से जुड़े निर्णय लेती थी, लेकिन अब यह अधिकार उपायुक्त (डीसी) को दे दिया गया है। इससे ग्राम सभा की शक्तियों को खत्म करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट को बचाने के लिए ग्राम सभा को अधिकार नहीं दिया गया और आदिवासियों के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है। शिड्यूल्ड एरिया में आदिवासियों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं पुस्तैनी जमीन और रूढ़िजन्य परंपराओं को पेसा नियमावली में गौण कर दिया गया है।
चंपाई सोरेन ने चेतावनी देते हुए कहा कि पेसा नियमावली लागू होने और ग्राम सभा को कमजोर किए जाने से एक दिन सीएनटी एक्ट और एसपीटी एक्ट भी नहीं बच पाएंगे। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार को शुरू से ही आदिवासी विरोधी बताते हुए कहा कि यह सरकार आदिवासी हितों के खिलाफ काम कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय लिया है कि पुस्तैनी जमीन पर किसी भी उद्योग को स्थापित नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही टाटा कंपनी के लीज नवीकरण का भी विरोध किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन पेसा नियमावली को राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिली, उसी दिन चतरा में हिंडालको कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित कर दिया गया।
अंत में चंपाई सोरेन ने कहा कि वह पेसा नियमावली के खिलाफ गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाएंगे और नियमावली की प्रतियों को जनता के बीच फाड़कर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
