इस साल मई का महीना काफी अनोखा साबित हो रहा है. आमतौर पर मई में तेज गर्मी और लू का कहर होता है, लेकिन इस बार कई इलाकों में मौसम थोड़ा ठंडा रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश, आंधी, ओले, तेज हवाएं और लू जैसी घटनाएं एक साथ देखी जा रही हैं. इस माह कई अलग वेदर सिस्टम एक्टिव हैं, जिसकी वजह से देश का तापमान सामान्य से कम बना हुआ है.
11 मई को भारत और आसपास के समुद्रों में कुल नौ वेदर सिस्टम एक्टिव थे. इनमें एक कम दबाव क्षेत्र, एक पश्चिमी विक्षोभ, चार कम दबाव की ट्रफ और चार साइक्लोनिक सर्कुलेशन शामिल थे. जल्द ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाएं भी शामिल हो सकती हैं. IMD ने 7 मई को पूर्वानुमान किया था कि तीसरे सप्ताह में मानसून दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंच सकता है. मई के पहले सप्ताह में पूरे देश में सामान्य से 79 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई
विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार, मई-जुलाई तक सुपर अल-नीनो आ सकता है. अल-नीनो के कारण भारत का मौसम और भी अनिश्चित हो सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग, नमी का बढ़ता प्रवाह और हवाओं में बदलाव के कारण मौसम की घटनाएं कई तरह की हो रही हैं. यही वजह है कि मानसून से पहले ही देश में मानसून जैसी स्थितियां बन रही हैं.
मई के पहले सप्ताह में पूरे देश में सामान्य से 79 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज की गई.इस मई का मौसम साबित कर रहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत का मौसम पहले से कहीं ज्यादा अनिश्चित हो गया है. एक ही समय में बारिश, ओले, लू, तेज हवाएं और गर्म रातें एक साथ हो रही हैं. सुपर अल-नीनो के आने के साथ यह चुनौती और बढ़ सकती है. इसलिए मौसम विभाग की सलाह को गंभीरता से लेना जरूरी है.
