रांची | झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Deepika Pandey Singh ने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर केंद्र सरकार पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखने की कोशिश कर रही है, जिससे उसकी नीयत पर सवाल खड़े होते हैं। वर्ष 2023 में पारित Nari Shakti Vandan Adhiniyam से उम्मीद थी कि जनगणना के बाद ओबीसी वर्ग को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन तीन साल बाद भी इसे लागू नहीं किया गया।
मंत्री ने कहा कि बिना जनगणना के परिसीमन लागू करने की कोशिश संविधान और संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा पर अब जनता को संदेह होने लगा है, क्योंकि महिलाओं, किसानों और मजदूरों से किए गए कई वादे अब तक अधूरे हैं।
Deepika Pandey Singh ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति संवेदनशील होती, तो उन्नाव, हाथरस, कठुआ और मणिपुर जैसी घटनाओं पर चुप्पी नहीं साधती। साथ ही महिला खिलाड़ियों के आंदोलन के दौरान भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।

प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया संबोधन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर लगाए गए आरोप भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक पारित कराने में विपक्ष ने पूरा सहयोग दिया था, लेकिन इसके बावजूद इसे लागू करने में देरी और 16 अप्रैल 2026 को देर रात नोटिफिकेशन जारी करना सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है।
अंत में उन्होंने मांग की कि लोकसभा, राज्यसभा और सभी विधानसभाओं में तत्काल प्रभाव से 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को वास्तविक और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सके।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और स्पष्ट नीयत की आवश्यकता है।
