रामगढ़, 17 अप्रैल।
रजरप्पा छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर में हाल ही में हुई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई ने कई परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। जहां कभी श्रद्धालुओं की भीड़, दुकानों की चहल-पहल और रोजगार की उम्मीदें दिखती थीं, आज वहां मलबा और सन्नाटा पसरा हुआ है।
इस कार्रवाई में कुल 254 दुकानों को हटाया गया, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। इन दुकानों के पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और परिवारों के भविष्य की उम्मीदें जुड़ी थीं, जो अब अचानक संकट में आ गई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन यह तभी सार्थक माना जाएगा जब उसमें मानवीय संवेदनाएं भी शामिल हों। अतिक्रमण हटाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास के लिए क्या ठोस योजना बनाई गई है।
दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि जिन लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है, उनके लिए वैकल्पिक दुकानों की व्यवस्था, पुनर्वास योजना और आर्थिक सहायता पर जल्द निर्णय लिया जाए।
लोगों का कहना है कि विकास की प्रक्रिया में यदि लोगों का जीवन ही अस्थिर हो जाए, तो वह अधूरा विकास माना जाएगा। ऐसे में जरूरी है कि प्रभावित परिवारों को फिर से खड़ा होने का अवसर दिया जाए, ताकि वे अपने जीवन को दोबारा संवार सकें।
