रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा है कि राज्य सरकार का उद्देश्य झारखंड को केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों का निर्यातक राज्य बनाकर सीमित रखना नहीं है, बल्कि संसाधनों के मूल्य संवर्धन, सतत औद्योगिकीकरण और जन-केंद्रित विकास के माध्यम से आगे बढ़ाना है, ताकि इसका सीधा लाभ राज्य की जनता को मिल सके।
मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक में भाग ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और संस्थागत निवेशकों को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “हमारा लक्ष्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित हों और आम लोगों का जीवन स्तर बेहतर बने।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सततता का दायरा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक समावेशन भी शामिल हैं, खासकर स्थानीय और आदिवासी समुदायों के संदर्भ में।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य सरकार की उन पहलों की जानकारी भी साझा की, जिनके तहत खनिज आधारित डाउनस्ट्रीम उद्योगों, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देकर रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

पर्यटन क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में विशाल और अब तक काफी हद तक अप्रयुक्त पर्यटन क्षमता मौजूद है। राज्य सरकार इको-टूरिज्म, प्रकृति आधारित पर्यटन और सांस्कृतिक पर्यटन को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित करना चाहती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को दोहराते हुए मुख्यमंत्री सोरेन ने वैश्विक निवेशकों और साझेदारों से जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्रों में झारखंड के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित इस वैश्विक सततता संवाद में झारखंड की सक्रिय भागीदारी राज्य की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आर्थिक प्रगति को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ा जा रहा है।
