स्वास्थ्य योजनाओं में देरी पर झारखंड सरकार सख्त, सहिया का लंबित मानदेय तत्काल भुगतान के निर्देश

रांची | झारखंड में स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी, भुगतान की धीमी गति और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) मद में अब तक केवल 50 प्रतिशत राशि खर्च होने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने मंगलवार को सभी जिलों के सिविल सर्जनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की।

बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी सहिया का लंबित मानदेय तत्काल भुगतान किया जाए। साथ ही एनएचएम मद में शेष राशि का उपयोग जनवरी माह के अंतिम सप्ताह तक अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा गया। उन्होंने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अजय कुमार सिंह ने एनएचएम, 15वें वित्त आयोग एवं प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि एनएचएम मद में अब तक केवल 50 प्रतिशत राशि ही खर्च हो सकी है, जिसे उन्होंने गंभीर विषय बताया और इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि लंबित बिलों का शीघ्र भुगतान, मानदेय एवं वेतन मद में खर्च तथा विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के माध्यम से व्यय की गति बढ़ाई जाए।

पीएम-अभीम योजना की समीक्षा करते हुए अपर मुख्य सचिव ने कहा कि जहां टेंडर प्रक्रिया लंबित है, वहां उसे अविलंब पूरा किया जाए और जहां टेंडर हो चुके हैं, वहां कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी आम जनता तक पहुंचेगा, जब उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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