झारखंड में अब 6 प्रमुख इनामी नक्सली बताए जा रहे हैं। इन पर कुल 55 लाख रुपये का इनाम है। देखें नाम, इनाम और पूरी जानकारी।
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झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों के अभियान के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक राज्य में अब छह प्रमुख इनामी नक्सली और उग्रवादी सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर हैं। इन छह पर कुल 55 लाख रुपये का इनाम घोषित बताया गया है। इनमें सबसे अधिक 15 लाख रुपये का इनाम नितेश यादव उर्फ इरफान उर्फ नंदू उर्फ किरानी पर है।
रिपोर्ट के अनुसार इन छह नामों में नितेश यादव, मनोहर गंझू, गोदराय यादव, पंकज कोरवा, राजू भुइयां और आरिफ जी उर्फ शशिकांत उर्फ सुरेश शामिल हैं। इनका संबंध मुख्य रूप से पलामू, गढ़वा और लातेहार क्षेत्र से बताया गया है। हालांकि, इनकी वर्तमान लोकेशन के संबंध में सुरक्षा एजेंसियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इनाम की बात करें तो नितेश यादव पर 15 लाख रुपये, मनोहर गंझू पर 10 लाख रुपये और गोदराय यादव पर 10 लाख रुपये का इनाम बताया गया है। पंकज कोरवा और राजू भुइयां पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम है। वहीं टीएसपीसी से जुड़े आरिफ जी उर्फ शशिकांत उर्फ सुदेश उर्फ सुरेश पर 10 लाख रुपये का इनाम बताया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों और पूर्व की इनामी सूचियों में इन नामों तथा इनके संगठनात्मक पदों का उल्लेख मिलता है।

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के बाद माओवादी नेटवर्क पर दबाव बढ़ने की बात रिपोर्टों में कही गई है। 2026 में भी बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही कई प्रमुख इनामी उग्रवादियों की गिरफ्तारी या अभियान के दौरान कार्रवाई से सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब बचे हुए वांटेड चेहरों पर है।
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हालांकि, ‘झारखंड में सिर्फ छह नक्सली बचे हैं’ और ‘राज्य में कुल कितने सक्रिय या फरार उग्रवादी हैं’—इन दोनों बातों में अंतर है। उपलब्ध रिपोर्टों में छह प्रमुख इनामी चेहरों की बात कही गई है, इसलिए इसे राज्य में मौजूद सभी नक्सलियों की अंतिम संख्या के रूप में नहीं समझना चाहिए। सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक सूची में बदलाव के साथ यह संख्या भी बदल सकती है।
फिलहाल इन छह इनामी चेहरों की तलाश सुरक्षा एजेंसियों के अभियान का अहम हिस्सा बनी हुई है। आने वाले दिनों में गिरफ्तारी, आत्मसमर्पण या आधिकारिक सूची में बदलाव से इस मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
