JSSC CGL परीक्षा रद्द: हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, CBI जांच पर अड़े छात्र

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झारखंड सरकार ने JSSC CGL परीक्षा रद्द कर दी है। TDPL से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द होंगी। छात्र अब भी CBI जांच की मांग पर अड़े हैं।

रांची/देवघर | 17 अगस्त 2026

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही आउटसोर्स एजेंसी TDPL के माध्यम से आयोजित कराई गई अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

सरकार के इस फैसले को पिछले करीब 24 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्र अभ्यर्थियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि, परीक्षा रद्द होने के बाद भी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्रों की प्रमुख मांग अब भी CBI जांच को लेकर है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच भी जरूरी है।

सरकार के फैसले की पुष्टि करते हुए विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है।

24 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा फैसला

JSSC और JPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और भूख हड़ताल के जरिए अभ्यर्थी सरकार से परीक्षा रद्द करने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग कर रहे थे।

आंदोलन के दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन CBI जांच समेत कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन सकी। सोमवार को सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के निर्णय के बाद आंदोलनकारी छात्रों के बीच खुशी का माहौल देखने को मिला।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई, जिसमें भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

TDPL से जुड़ी परीक्षाएं भी होंगी रद्द

सरकार के फैसले का दायरा सिर्फ JSSC-CGL तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, TDPL एजेंसी के माध्यम से वर्ष 2014 के बाद आयोजित कराई गई भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।

TDPL की भूमिका को लेकर छात्रों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। अब सरकार ने एजेंसी से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लेकर भर्ती परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

वर्ष 2014 से भर्ती परीक्षाओं की होगी व्यापक जांच

सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों की जांच का दायरा भी बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2014 से अब तक हुई छोटी-बड़ी भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की व्यापक जांच की जाएगी।

इसके लिए जांच समिति गठित करने की बात कही गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता IAS अधिकारी अमिताभ कौशल करेंगे। साथ ही भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर भी जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने परीक्षा प्रक्रिया में SOP यानी Standard Operating Procedure के पालन पर भी जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि निर्धारित SOP का पालन किया गया होता तो इस तरह की अनियमितताओं की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

14वीं JPSC और बैकलॉग परीक्षाओं पर भी फैसला

छात्र आंदोलन के बीच JPSC की परीक्षाओं को लेकर भी सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार 14वीं JPSC परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने की दिशा में भी फैसला लिया गया है।

इसके अलावा TDPL द्वारा आयोजित अन्य परीक्षाओं को लेकर भी जांच और रद्द करने की प्रक्रिया को लेकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। इससे भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

परीक्षा रद्द, फिर भी CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा नहीं की है। आंदोलनकारियों का कहना है कि परीक्षा रद्द करना उनकी मांगों का सिर्फ एक हिस्सा है।

छात्रों की सबसे बड़ी लंबित मांग CBI जांच है। उनका तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। जब तक इस मांग पर सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात छात्र नेताओं की ओर से कही जा रही है।

यही वजह है कि सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलन का भविष्य पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुआ है।

JSSC-CGL अभ्यर्थियों के सामने अब क्या चुनौती?

परीक्षा रद्द होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई परीक्षा कब आयोजित की जाएगी और उसकी प्रक्रिया कैसी होगी। हजारों अभ्यर्थियों ने JSSC-CGL की तैयारी में लंबे समय तक मेहनत की थी। ऐसे में परीक्षा रद्द होने से जहां कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों को राहत मिली है, वहीं उन्हें दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

सरकार के सामने अब नई परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की चुनौती है। परीक्षा की नई तारीख, एजेंसी का चयन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी और परिणाम प्रक्रिया जैसे मुद्दे अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर नजर

JSSC-CGL विवाद ने झारखंड की भर्ती परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार की ओर से जांच समिति गठित करने और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही गई है। अब इस बात पर नजर रहेगी कि जांच की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की जाती है।

छात्रों की मांग है कि भविष्य में किसी भी भर्ती परीक्षा में पारदर्शिता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं का भविष्य परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा है।

छात्रों की बड़ी जीत, लेकिन आंदोलन का अगला चरण बाकी

JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला निश्चित रूप से झारखंड के छात्र आंदोलन में एक बड़ा मोड़ है। करीब 24 दिनों के आंदोलन के बाद सरकार ने छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक को स्वीकार कर लिया है।

हालांकि, CBI जांच की मांग अभी भी आंदोलन का अहम मुद्दा बनी हुई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि छात्र आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो गया है। अब सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अगली बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा CBI जांच और भर्ती परीक्षाओं में स्थायी सुधार का रहेगा।

फिलहाल JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, लेकिन सरकार के सामने नई परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने और युवाओं का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती है।

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