सम्माननीय द्रौपती जी मुर्मू । इन्हें देखकर मन में यही विचार आया

सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर बैठा व्यक्ति भी जब नंदी के कान में अपनी प्रार्थना कहता है, तो यह याद दिलाता है कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो जाए, मनुष्य की आशाएँ, चिंताएँ और विश्वास उससे भी बड़े होते हैं। राष्ट्रपति भवन से लेकर मंदिर की देहरी तक हर हृदय में कुछ अनकही प्रार्थनाएँ होती हैं। यह इस फोटो से परिलक्षित हो रहा। शायद इसी का नाम आस्था है –जहाँ अधिकार नहीं, केवल और केवल वल विनम्रता बोलती है। विचार मन में यह भी आया कि जहाँ एक और कम पढ़े लिखे और सोशल मीडिया पर केवल लाइक्स और कमेंट लेने के लिए नफरत फैलाने वाले लोग प्रभु श्रीराम का, भगवान श्री कृष्ण का और अन्य हिन्दू देवी देवताओं का प्रतिदिन घोर अपमान कर रहे हैं, वही देश के सर्वोच्च पद पर आसीन एक शिक्षित स्त्री मन में उमंग और आस्था लिए ईश्वर के दर पर माता टेक रही है और सब कुछ होते हुए भी भोलेनाथ से कुछ मांग रही है। सचमुच इस चित्र ने मन को गदगद् कर दिया।

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