बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने व्यवस्था सुधारने और जनता का भरोसा कायम करने की मांग की।
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झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर राज्य की शासन व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर तीखा हमला बोला है। मरांडी ने मुख्यमंत्री को आत्ममंथन करने की सलाह देते हुए कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में व्यवस्था किस स्थिति तक पहुंच गई है, इस पर मुख्यमंत्री को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभी भी समय है कि सरकार व्यवस्था में सुधार करे और जनता का भरोसा दोबारा कायम करे।
बाबूलाल मरांडी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए कई मामलों का जिक्र किया। उन्होंने जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप गठित होने का उल्लेख किया। साथ ही ईडी अधिकारियों पर कथित तौर पर फर्जी एससी-एसटी एक्ट लगाने के मामले में जवाब नहीं देने पर उच्च न्यायालय की ओर से लगाए गए 10 हजार रुपये के जुर्माने का भी जिक्र किया।
नेता प्रतिपक्ष ने शराब घोटाला मामले को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि एसीबी की अदालत में सरकार के एक सचिव पर शराब नीति में बदलाव के लिए 50 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने की बात कही गई है। इसके अलावा पत्थर घोटाला मामले में सीबीआई जांच के आदेश और मुख्य आरोपित द्वारा मुख्यमंत्री के प्रभाव का इस्तेमाल किए जाने संबंधी अदालत की टिप्पणी का भी उन्होंने उल्लेख किया।
पेपर लीक मामले को लेकर भी बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक समय मुख्यमंत्री छात्रों को ही माफिया बताते थे, जबकि अब उनके करीबी लोगों की ओर से पैसे लेकर इंटरव्यू में अंक बढ़ाने के कथित सबूत अदालत के सामने आने की बात कही जा रही है।
मरांडी ने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री अपने विश्वस्त लोगों और करीबी अधिकारियों को भ्रष्टाचार से रोक सकते थे, फिर ऐसा क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि उसके कार्यकाल में कितने अधिकारियों का करियर प्रभावित हुआ, कितनी संस्थाओं की विश्वसनीयता कमजोर हुई और जनता का सरकारी व्यवस्था से भरोसा कितना कम हुआ।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बालू, पत्थर, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों का इस्तेमाल जनता के हित, विकास और रोजगार के लिए होना चाहिए। उन्होंने प्रखंड, थाना और सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
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उन्होंने कहा कि सत्ता किसी के पास स्थायी नहीं रहती। लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी की राजनीतिक परिस्थितियों का उदाहरण देते हुए मरांडी ने मुख्यमंत्री से समय रहते गलतियों से सबक लेने और शासन व्यवस्था सुधारने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते अहंकार करना आसान है, लेकिन सत्ता जाने के बाद वही अहंकार सबसे बड़ा बोझ बन जाता है। मरांडी ने कहा कि इतिहास किसी को माफ नहीं करता, इसलिए सरकार को समय रहते चेतना चाहिए।
