Radhakrishna Kishore Security: झारखंड के वित्त मंत्री ने लौटाई सुरक्षा, 5 दिनों से बिना गार्ड के कर रहे सरकारी दौरे

Radhakrishna Kishore Security विवाद के बीच झारखंड के वित्त मंत्री ने सुरक्षा गार्ड और वाहन लौटा दिए। पिछले 5 दिनों से बिना सुरक्षा के कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं

झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों Radhakrishna Kishore Security को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था को वापस लौटा दिया है। जानकारी के अनुसार, मंत्री पिछले पांच दिनों से बिना किसी सुरक्षा गार्ड के सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल हो रहे हैं।वित्त मंत्री का यह कदम उस समय सामने आया है जब पुलिस मुख्यालय की ओर से उनकी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल एक वाहन को वापस लेने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए सुरक्षा से संबंधित सभी सुविधाएं वापस कर दीं। हालांकि, वह अभी भी मंत्री पद के लिए आवंटित सरकारी वाहन का उपयोग कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस मुख्यालय ने वित्त विभाग को एक पत्र भेजा था। इस पत्र में वित्त मंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में शामिल वाहनों में से एक वाहन को वापस लेने की बात कही गई थी।बताया गया कि वित्त मंत्री की सुरक्षा में कुल चार वाहन लगाए गए थे और उनकी सुरक्षा के लिए 16 सुरक्षाकर्मी तैनात थे। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद वित्त विभाग के संयुक्त सचिव ने इस संबंध में एक आधिकारिक पत्र वित्त मंत्री को भेजा।यही पत्र पूरे घटनाक्रम की वजह बना। मंत्री का मानना था कि यदि एक वाहन कम कर दिया जाता है तो 16 सुरक्षाकर्मियों को केवल तीन वाहनों में समायोजित करना व्यावहारिक नहीं होगा।

Radhakrishna Kishore Security मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्री ने केवल अतिरिक्त वाहन को लेकर आपत्ति नहीं जताई, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही वापस करने का फैसला कर लिया।सूत्रों के मुताबिक, पत्र मिलने के बाद उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों और सुरक्षा वाहनों को वापस कर दिया। इसके बाद से वह बिना किसी सुरक्षा गार्ड के सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।गुरुवार को आयोजित झारखंड कैबिनेट की बैठक में भी वित्त मंत्री बिना सुरक्षा कर्मियों के पहुंचे। इस दौरान राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को

जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्री पिछले पांच दिनों से बिना किसी सुरक्षा कवच के अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।वे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, बैठकों और प्रशासनिक गतिविधियों में सामान्य तरीके से भाग ले रहे हैं। हालांकि सुरक्षा गार्ड नहीं होने के बावजूद वे मंत्री पद के लिए उपलब्ध सरकारी वाहन का उपयोग कर रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी राज्य के वित्त मंत्री का इस तरह सुरक्षा व्यवस्था छोड़ देना एक असामान्य कदम माना जा सकता है।

Radhakrishna Kishore Security को लेकर लिए गए इस फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस छेड़ दी है।कुछ लोग इसे सरकारी व्यवस्था के प्रति असंतोष का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि मंत्री ने व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए यह निर्णय लिया है। अभी तक सरकार या पुलिस मुख्यालय की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।हालांकि यह स्पष्ट है कि सुरक्षा वाहन वापस लेने से जुड़े पत्र के बाद ही घटनाक्रम ने नया मोड़ लिया।

राज्य सरकारों में मंत्री पद पर बैठे जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ सरकारी दायित्वों के निर्वहन के दौरान संभावित जोखिमों को कम करना होता है।विशेष रूप से वित्त, गृह और अन्य महत्वपूर्ण विभागों से जुड़े मंत्रियों को अक्सर सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में किसी मंत्री द्वारा स्वेच्छा से सुरक्षा लौटाना सामान्य प्रशासनिक घटनाओं से अलग माना जाता है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर भविष्य में सुरक्षा सुविधाएं दोबारा स्वीकार करेंगे या नहीं। सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से भी इस विषय पर कोई नया निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।हालांकि Radhakrishna Kishore Security का यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है। वित्त मंत्री का कहना हो या प्रशासनिक व्यवस्था का पक्ष, दोनों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।फिलहाल राज्य के वित्त मंत्री बिना सुरक्षा गार्ड के ही अपने सरकारी दायित्व निभा रहे हैं और यह फैसला झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण चर्चा का केंद्र बन गया है।

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