भारतीय नागरिकता पाना अब आसान नहीं होगा, क्योंकि भारत सरकार ने नागरिकता के नियमों में अहम बदलाव कर दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने नए बदलावों का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। नए नियमों के अनुसार नागरिकता पाने के लिए अब एक शर्त पूरी करने के बाद ही आवेदन मंजूर किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव नागरिकता आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए किया गया है। साथ ही इससे दोहरी नागरिकता या विदेशी दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकने में मदद मिलेगी। भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है। इसलिए भारतीय नागरिकता मिलने के बाद विदेशी पासपोर्ट रखना नियमों के खिलाफ माना जाता है।
केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक नया नोटिफिकेशन जारी कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक अल्पसंख्यक आवेदकों के लिए अतिरिक्त खुलासे अनिवार्य कर दिए. अब इन देशों से भारत आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को यह बताना होगा कि उनके पास इन देशों का कोई वैध या एक्सपायर्ड पासपोर्ट है या नहीं. अगर पासपोर्ट है, तो उसकी पूरी जानकारी देनी होगी और भारतीय नागरिकता मिलने के 15 दिन के भीतर उसे सरेंडर भी करना पड़ेगा.
गृह मंत्रालय के इस फैसले को CAA प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिनमें कुछ आवेदकों के पास पुराने या अमान्य विदेशी पासपोर्ट पाए गए. भारतीय कानून के तहत दोहरी नागरिकता और दो पासपोर्ट रखने की अनुमति नहीं है. ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारत की नागरिकता मिलने के बाद कोई व्यक्ति दूसरे देश की पहचान या दस्तावेज का इस्तेमाल न कर सके.
