धनबाद, 22 मार्च। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे सरयू राय ने असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की भूमिका पर खुलकर अपनी बात रखी।
मीडिया से बातचीत के दौरान सरयू राय ने कहा कि असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग भले ही झारखंड और ओडिशा से गए हों, लेकिन अब वे पूरी तरह स्थानीय परिवेश में रच-बस गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वहां के मतदाता स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व को ही प्राथमिकता देते हैं और बाहरी हस्तक्षेप को ज्यादा महत्व नहीं देते।
इस दौरान उन्होंने हेमंत सोरेन पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि वे असम जाने की कोशिश कर रहे हैं। राय ने इसे एक तरह की राजनीतिक प्रतिक्रिया बताते हुए कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा पहले झारखंड आ चुके हैं, ऐसे में यह “बदले की राजनीति” का हिस्सा हो सकता है।
असम चुनाव में जेएमएम और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संभावित गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कांग्रेस की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी इतनी “दिमागी दिवालिया” नहीं हुई है कि वह हवा का रुख देखकर गठबंधन करे।
हालांकि, सरयू राय ने यह भी माना कि हेमंत सोरेन की भूमिका की पूरी तरह आलोचना करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री संभवतः यह मानते हैं कि असम में रह रहे आदिवासी समाज के मुद्दों को उठाने से उन्हें राजनीतिक समर्थन मिल सकता है। साथ ही, अन्य राज्यों में कुछ सीटें जीतकर पार्टी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिश भी हो सकती है।
सरयू राय के इस बयान के बाद असम चुनाव में जेएमएम की रणनीति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
