पेसा संबंधित कैबिनेट से पारित प्रस्ताव सार्वजनिक करे हेमंत सरकार: बाबूलाल

बाबूलाल मरांडी ने की दलीय आधार पर निकाय चुनाव कराने की मांग

रांची, 27 दिसंबर

झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को एक बार फिर पेसा प्रस्ताव को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार में पेसा से संबंधित कैबिनेट प्रस्ताव को सार्वजनिक करने का साहस क्यों नहीं दिखाया जा रहा, यह अपने आप में कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

भाजपा की प्रदेशस्तरीय बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार के इस रवैये से स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं कोई ऐसी बात है, जिसे जनता से छुपाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार पेसा प्रस्ताव पारित करने का श्रेय ले रही है और उसका स्वागत भी करवा रही है, वहीं दूसरी ओर यह बताने से बच रही है कि आखिर उस प्रस्ताव में क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं।

मरांडी ने कहा कि पेसा एक्ट जिन समाजों, उनकी परंपराओं, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों और पारंपरिक शासन व्यवस्थाओं से जुड़ा हुआ है, आज वही समाज इस प्रस्ताव की वास्तविक स्थिति से अनजान है। उन्होंने कहा कि न केवल आम जनता, बल्कि जनप्रतिनिधि भी केवल मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर ही जानकारी प्राप्त कर पा रहे हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कैबिनेट से पारित पेसा प्रस्ताव को अविलंब सार्वजनिक करे, ताकि जनता किसी प्रकार के भ्रम या दिग्भ्रमित स्थिति का शिकार न हो।

बैठक के दौरान बाबूलाल मरांडी ने नगर निकाय चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराए जाने चाहिए, जिससे विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता जनप्रतिनिधि बनकर अधिक सक्रियता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जनता की सेवा कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि गैर-दलीय चुनाव मसल और मनी पावर को बढ़ावा देते हैं, जो स्वच्छ और स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश प्रभारी और सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा कि यह बैठक पूरी तरह से सांगठनिक थी, जिसमें संगठनात्मक विषयों के साथ-साथ आगामी कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता समय-समय पर इस तरह की बैठकों के माध्यम से पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों की समीक्षा करते रहते हैं।

वहीं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी पेसा प्रस्ताव पारित होने के बाद उसे सार्वजनिक नहीं किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पेसा नियमावली अधिसूचित क्षेत्रों की पारंपरिक रूढ़िगत व्यवस्थाओं पर आधारित है और यह कानून प्राचीन पारंपरिक सुशासन एवं स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित और संवर्धित करता है। अर्जुन मुंडा ने भी सरकार से मांग की कि कैबिनेट से पारित पेसा प्रस्ताव को पब्लिक डोमेन में लाया जाए।

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